चैनसे नये अंदाझमें मिल रही हुं

7 07 2012

ना इधर के रहे

ना उधर के रहे

बिच में लटकते रहे

ना India को भुला सके

ना America अपना सके

इंडियन अमेरिकन बन के काम चलाते रहे

ना गुजराती को छोड़ सके

ना अंग्रेजी को पकड़ सके

देसी accent में गोरो को confuse करते रहे

ना turkey को पका सके

ना ग्रेवी बना सके

मुर्गी को दम देके thanks giving मनाते रहे

ना Christmas tree बना सके

ना बच्चो को समजा सके

दिवाली पर Santa बनकेतोहफे बाँटते रहे

ना shorts पहेन सके

ना सलवार कमीज़ छोड़ सके

Jeans पर कुरता और स्नीकर्स पहेन कर इतराते रहे

ना नाश्ते में Donut खा सके

ना खिचड़ी कढी को भुला सके

Pizza पर मिर्च छिड़ककर मज़ा लेते रहे

ना गरमी को भुला सके

ना Snow को अपना सके

खिड़कीसे सूरज को देखकर Beautiful Day कहेते रहे

अब आयी बारी Baroda जाने की

तो हाथ में पानी का शीशा लेकर चलते रहे

लेकिन वहां पर…………

. ना भेल पूरी खासके

ना लस्सी पी सके

पेट के दर्द से तड़पते रहे हरड़े और एसबगुल से काम चलाते रहे

ना मच्छर से भाग सके

ना खुजली को रोक सके

Cream से दर्दो को छुपाते रहे

ना फकीरों से भागसके

ना Dollar को छुपा सके

नोकरो से पीछा छुड़ाकर भागतेरहे

ना इधर के रहे

ना उधर के रहे

कमबख्त कही के ना रहे

बस “ABCD (American Born Confused Desi) ” औलाद को और

Confuse बनाते रहे

NO HARD FEELINGS….PLEASE.

Listen to  me just wrote  on the spot.

मेरा जवाब सुनिये आपको जरूर पसंद आयेगा

हम यहां के भी है

हम वहांके भी है

दोनो जहांको गले लगाते रहे

ईन्डिया पर नाज है

अमरिका पर इतराते है

ईन्डियन अमेरिकन बनकर जीते रहे

गुजराती क्यों छोडे भाई  ?

अंग्रेजीमें फट्फट बोलते रहे

देशीएक्सन्ट गोरोंको समजाते रहे

वेजी प्यारसे खाते है

नोन वेज अपनी पसंदसे खाने लगे

ईन्डियन और अमेरिकन त्योहार मनाते रहे

दिवाली पे दिये जलाये

क्रिस्टमस ट्री भी लगाया

दोनों परिवार और मित्रोके साथ मनाते रहे

शर्ट और पेन्टभी पहना

सारी कुरता शौकसे पहने

सब भिन्न वस्त्रोंकी मझे शौकसे लुटते रहे

जब मुंबई जानेका मौका मिला

घरमें उबाला हुआ पानी पीते रहे

अच्छी रेस्टोरांमे खाना खाने लगे

मित्र और परिवारको गले लगाते रहे

हम ए, बी, सी,,डी जरूर है

क्योंकी हम ‘अमेरिकन बोर्न “क्लेवर” देशी’ है

अपनी औलादको आगे बढनेके मौके देते रहे

प्रविणा अविनाश ह्युस्टन टेक्सास. __.

ENJOY_,_.___


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6 responses

7 07 2012
Vinod R. Patel

You have described the position of Indian American very nicely.

Glad to find that you can make nice poem in Hindi language too.

Congratulations, Pravinaben.

7 07 2012
ramola dalal

Very good composition. You have that talent so you can do it instantly. Keep up the good work.

Ramola

7 07 2012
hemapatel

પ્રવિણાબેન,
તમે તદન સાચી વાત કરી છે, તમારો જવાબ સચોટ અને જોરદાર છે.
અને આપણે બધા એવી રીતે જ જીવીએ છીએ. देशी भी है ह्म, वीदेशी भी है.
વારંવાર વાંચવી ગમે એવી પોષ્ટ.

8 07 2012
pragnaju

अपने आप पर ईतराते रहे…!
………………
जल बिच मीन पियासी,
मोहे लखि-लखि आवे हांसी।

8 07 2012
navin banker

Now I read. this poem in a real spirit.

Navin Banker

http://navinbanker.gujaratisahityasarita.org/

11 07 2012
manvant

kya kahe kya naa kahe ?Aapka chintan atyant sundar hai !Abhinandan !

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