क्या मझेकी बात है

12 01 2015

क्या मझेकी बात है

स्वामी विवेकान्द जयंति है

कायरता और डर दोनो

दुम दबाके भागे !

****
सपनेमें जो आया
बहोतही सताया
जब आंख खुली तो
दुम दबाके भागा
खुली खिडकी से झांका
पिस्तोल दिखाया तो
धक्के मारके निकाला
दुम दबाके भागा
जोरसे सीटी बजाई
मेरी चुन्नी गिराई
मैंने आंख निकाली तो
दुम दबाके भागा
रिमझिम बारिश आई
छाता हाथसे उडाई
भीगी चोली देखकर
दुम दबाके भागा
मुन्ना मुस्कुराया
प्यारसे गले लगाया
भरी पिचकारी देखकर
दुम दबाके भागा
वापस लौटके न आया
पीछे मुडके न देखा
अपनी खटिया पे जाकर
लंबी तानके सोया

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3 responses

13 01 2015
chandravadan

क्या मझेकी बात है
स्वामी विवेकान्द जयंति है
कायरता और डर दोनो
दुम दबाके भागे Saras Vichar
Chandravadan
http://www.chandrpukar.wordpress.com
Avjo @ Chandrapukar
You must have 3 Books I sent to Vijaybhai
Hope you like them

13 01 2015
www.wordpress.com

Happy Anniversary!

You registered on WordPress.com 8 years ago!

Thanks for flying with us. Keep up the good blogging!

13 01 2015
SARYU PARIKH

Very nice. Enjoyed. Saryu

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