ઈશાવાસ્ય ઉપનિષદ शांति मंत्र

6 08 2016

OM

*****************************************************************

મિત્રો શ્રાવણ મહિનાનો પહેલો શનીવાર સહુને અભિનંદન.

ઈશાવાસ્ય ઉપનિષદ તત્વજ્ઞાનનો સહુથી ઉત્તમ અને નાનો ગ્રંથ છે.

આશા રાખું છું આપ સહુ આવકારશો. ચાલો ત્યારે માણીએ.

************************************************

“अहिंसा परमो धर्मः”जबकि पूर्ण श्लोक इस तरह से है।

“अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तदैव च: l

“अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है… क्या हमारे कोई भी भगवान् बिना शस्त्र के हैं?
नहीं ना… फिर हिन्दुओं के घर में शस्त्र क्यों नहीं होते?

 

 

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्
न ब्रूयात् सत्यमप्रियं।
प्रियं च नानृतं ब्रूयात्
एष धर्मः सनातनः॥
सत्य बोलें, प्रिय बोलें पर अप्रिय सत्य न बोलें और प्रिय असत्य न बोलें, ऐसी सनातन रीति है ॥

*

विद्या मित्रं प्रवासेषु
भार्या मित्रं गॄहेषु च

व्याधितस्यौषधं मित्रं
धर्मो
मित्रं मॄतस्य च
प्रवास (घर से दूर निवास) में विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोग में औषधि मित्र होती है और मृतक का मित्र धर्म होता है ॥
धॄति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो
दशकं धर्मलक्षणम्
धर्म के दस लक्षण हैं – धैर्य, क्षमा, आत्म-नियंत्रण, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रिय-संयम, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना॥   
पुस्तकस्था तु या विद्या
परहस्तगतं
धनं

कार्यकाले समुत्पन्ने
न सा विद्या न तद्
धनं
पुस्तक में लिखी हुई विद्या, दूसरे के हाथ में गया हुआ धन, जरुरत पड़ने पर  काम नहीं आते हैं।

******************************************

आयुषः क्षण एकोऽपि
सर्वरत्नैर्न न लभ्यते।
नीयते स वृथा येन
प्रमादः सुमहानहो ॥
आयु का एक क्षण भी सारे रत्नों को देने से प्राप्त नहीं किया जा सकता है, अतः इसको व्यर्थ में नष्ट कर देना महान असावधानी है॥

****************************************************************

शांति मंत्र

*********

१.

ॐ पूर्णं अदः पूर्णं ईदम

पूर्णात पूर्णम उदच्यते ।

पूर्णस्य पूर्ण आदाय

पूर्णम एव अवशिष्यते।।

ऑम शांतिः शांतिः शांतिः

****

ૐ તે પૂર્ણ છે, અપૂર્ણ છે

પૂર્ણમાંથી પૂર્ણ નિષ્પન્ન થાય છે

પૂર્ણમાંથી પૂર્ણ કાઢી લેવાય તોય

પૂર્ણ જ શેષ રહે છે.

ઑ શાંતિઃ શાંતિઃ શાંતિઃ

****

ૐ પૂર્ણમાંથી પૂર્ણ ઉલેચાય છે. એ પૂર્ણમાંથી જ પૂર્ણ ઉત્પન્ન થાય છે. જો એ પૂર્ણમાંથી પૂર્ણની બાદબાકી કરીએ તો પણ બાકી પૂર્ણ રહે છે. આ આખું વિશ્વ પૂર્ણ છે. કો પણ જગ્યા એવી નહી મળે જ્યાં પૂર્ણનું અસ્તિત્વ નહી જણાય.

काकः कृष्णः पिकः कृष्णः को भेद पिककाकयोः
वसन्तसमये प्राप्ते काकः काकः पिकः पिकः

[Kakah krishna pikah krishna, Ko bheda pika kaka yoho?
Vasanta samaye praptey, Kakah kakah pikah pikaha]

The crow is black, and the cuckoo is black
What difference, then, between crow and cuckoo?
When spring arrives, it’s easy to tell
That the crow is a crow, and the cuckoo a cuckoo.

Therefore, don’t go by appearances. You never know how good someone is just by judging appearances 🙂

****************************************

 मूर्खस्य पञ्च चिन्हानि
गर्वो दुर्वचनं तथा।
क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥
 **********************
अष्टौ गुणा पुरुषं दीपयंति
प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च।
पराक्रमश्चबहुभाषिता च
दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च॥
आठ गुण पुरुष को सुशोभित करते हैं – बुद्धि, सुन्दर चरित्र, आत्म-नियंत्रण, शास्त्र-अध्ययन, साहस, मितभाषिता, यथाशक्ति दान और कृतज्ञता॥ 
Advertisements

Actions

Information

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s




%d bloggers like this: